बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ज़माने से कह दो, दिल के अरमानों का ये जनाज़ा मेरी यादों के खंडहर में,
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 796]
जीते जी मौत का अहसास दे रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 796]