बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ऐ दोस्त, ख्वाबों के उजड़ने का मातम मेरी वीरान ज़िंदगी में,
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।
नासूर बनकर रिस रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने।