बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
बस इतना समझ लो, टूटे हुए दिल का ये दर्द मेरे सीने के अंदर,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 798]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 798]