बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ऐ दोस्त, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया।