बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
खामोशियों के दरमियां, मोहब्बत में मिले धोखे का नासूर मेरे दिल के वीराने में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 731]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 731]