बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
सदा, जुदाई का ये कड़वा ज़हर मेरे दर्दमंद दिल में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।