बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
याद रखना, बेवफाई के गहरे ज़ख्म मेरे दर्दमंद दिल में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 761]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 761]