बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
बस इतना समझ लो, आंसुओं में भीगी ये पलकें मेरी सांसों की चुभन में,
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 973]
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 973]