४ लाइन शायरी (रुबाई)
मेरे हमदम, तेरी नज़रों का ये तीर मेरे ख्यालों की दुनिया में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 305]
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 305]