४ लाइन शायरी (रुबाई)
सुनो, तेरी सांसों की महक मेरे रोम-रोम के अहसास में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।