४ लाइन शायरी (रुबाई)
अक्सर, तेरी खामोशी का पैगाम मेरी आँखों की पुतलियों में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 310]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 310]