४ लाइन शायरी (रुबाई)
दिल की गहराइयों से, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी हर सुबह ओ शाम में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 695]
रूह को मदहोश कर रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 695]