४ लाइन शायरी (रुबाई)
सच है, तेरी हर अदा का जलवा मेरी ज़िंदगी के सफर में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 275]
अमृत बनकर घुल गया है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 275]