४ लाइन शायरी (रुबाई)
इश्क़ में, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी खुशियों के आशियाने में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 618]
खुदा की रहमत बन गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 618]