४ लाइन शायरी (रुबाई)
खुदा गवाह है, तेरे इश्क का पावन रंग मेरी सूनी रातों में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।