४ लाइन शायरी (रुबाई)
बस इतना समझ लो, तेरी इबादत का सुरूर मेरे सपनों के आंगन में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 564]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 564]