४ लाइन शायरी (रुबाई)
तेरी पाकीज़ा वफ़ा का साया मेरी खामोश इबादतों में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।
हर पल नया रंग भर रहा है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है।