४ लाइन शायरी (रुबाई)
कसम से, तेरी इबादत का सुरूर मेरे सपनों के आंगन में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 884]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 884]