४ लाइन शायरी (रुबाई)
दिल की गहराइयों से, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरी ज़िंदगी के सफर में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 195]
अमृत बनकर घुल गया है, कि दिलों के ये रूहानी रिश्ते कभी दूरियों से नहीं टूटते। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 195]