४ लाइन शायरी (रुबाई)
मेरी हर दुआ में, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरी तकदीर के पन्नों पर,
मेरी पहचान बन चुका है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 696]
मेरी पहचान बन चुका है, कि इश्क़ का ये खूबसूरत और पावन सफर कभी खत्म न हो। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 696]