४ लाइन शायरी (रुबाई)
खामोशियों के दरमियां, तेरे इश्क की ये बारिश मेरी खुशियों के आशियाने में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।