४ लाइन शायरी (रुबाई)
ज़िंदगी के सफर में, तेरे कदमों की आहट मेरी हर मुराद में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 844]
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 844]