४ लाइन शायरी (रुबाई)
यूं तो, तेरी दीवानगी का ये आलम मेरे रोम-रोम के अहसास में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 763]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 763]