४ लाइन शायरी (रुबाई)
बेशक, तेरी हर अदा का जलवा मेरी ज़िंदगी के सफर में,
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
अमृत बनकर घुल गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।