४ लाइन शायरी (रुबाई)
तेरी दीवानगी का ये आलम मेरे रोम-रोम के अहसास में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 123]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 123]