४ लाइन शायरी (रुबाई)
हां, तेरी बाहों का ये आशियाना मेरी रूह की गहराइयों में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 751]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 751]