४ लाइन शायरी (रुबाई)
खामोशियों के दरमियां, तेरी बाहों का ये आशियाना मेरी रूह की गहराइयों में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 847]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 847]