४ लाइन शायरी (रुबाई)
याद रखना, तेरे चेहरे का तबस्सुम मेरे सपनों के आंगन में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 452]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 452]