४ लाइन शायरी (रुबाई)
इश्क़ में, तेरे कदमों की आहट मेरी हर मुराद में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 268]
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 268]