४ लाइन शायरी (रुबाई)
खुदा गवाह है, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरी खामोश इबादतों में,
हर पल नया रंग भर रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 857]
हर पल नया रंग भर रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 857]