४ लाइन शायरी (रुबाई)
मेरे हमदम, तेरी यादों का ये चमन मेरी हर सांस में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 605]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 605]