🇮🇳 शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
तेरी वफाओं का ये समंदर मेरे दिल की धड़कनों में,
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 164]
कुछ इस तरह समाया हुआ है, कि अब तेरे इश्क में ही जीना और मरना मंजूर है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 164]