🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
अक्सर, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
खामोशी से रुला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है।
खामोशी से रुला रहा है, कि किसी को अपना बनाकर खोना बहुत ज्यादा दर्द देता है।