🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
सुनो, टूटे हुए दिल का ये दर्द मेरी उदासियों के आलम में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 758]
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 758]