🇮🇳 ज़िंदगी और हौसला शायरी
ऐ सनम, नेक कर्मों की ये महकती हुई खुशबू इस जीवन के हर एक पड़ाव पर,
आत्मिक शांति और आनंद बरसा रहा है, पर ज़िंदगी दोबारा नहीं मिलती इस वक़्त को बदलने के लिए। [ज़िंदगी और हौसला शायरी 835]
आत्मिक शांति और आनंद बरसा रहा है, पर ज़िंदगी दोबारा नहीं मिलती इस वक़्त को बदलने के लिए। [ज़िंदगी और हौसला शायरी 835]