दर्द भरी और तन्हाई शायरी
हां, तन्हाइयों का ये खौफनाक साया मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 822]
उम्र भर का नासूर बन गया है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 822]