दर्द भरी और तन्हाई शायरी
मेरी हर दुआ में, तन्हाइयों का ये खौफनाक साया मेरे सीने के अंदर,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 842]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [दर्द भरी और तन्हाई शायरी 842]