सैड शायरी इन हिंदी
ऐ दोस्त, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी यादों के खंडहर में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि यादों के सहारे ही ये कड़वी ज़िंदगी काटनी पड़ी।