सैड शायरी इन हिंदी
दिल की गहराइयों से, बेवफाई के गहरे ज़ख्म मेरी सांसों की चुभन में,
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 705]
अंधेरों में धकेल रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 705]