सैड शायरी इन हिंदी
मेरे हमदम, बेवफाई के गहरे ज़ख्म मेरी भीगी आँखों में,
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 665]
आंसुओं का सैलाब ला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया। [सैड शायरी इन हिंदी 665]