सैड शायरी इन हिंदी
सुनो, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरी उदासियों के आलम में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 934]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [सैड शायरी इन हिंदी 934]