इश्क़ और मोहब्बत शायरी
मेरे हमदम, तेरी मोहब्बत की खुशबू मेरी सूनी रातों में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है।
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है।