ग़ज़ल और नज़्म
खामोशियों के दरमियां, तेरी चाहत का नशा मेरी हर मुराद में,
चाँद की तरह चमक रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
चाँद की तरह चमक रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।