दोस्ती और यारी शायरी
अक्सर, दोस्ती के इस पावन रिश्ते की वफ़ा यादों के सुनहरे पन्नों पर,
सच्चा साथ निभा रहा है, कि तेरी यारी पर हमें खुद से भी ज्यादा फख्र और नाज़ है। [दोस्ती और यारी शायरी 772]
सच्चा साथ निभा रहा है, कि तेरी यारी पर हमें खुद से भी ज्यादा फख्र और नाज़ है। [दोस्ती और यारी शायरी 772]