२ लाइन बेस्ट शायरी
हर घड़ी, तेरी दीवानगी का ये आलम मेरी हर सुबह ओ शाम में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।