उर्दू शायरी में हर विधा का अपना एक नियम और कायदा होता है। अक्सर लोग शेर, ग़ज़ल और नज़्म को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें तकनीकी रूप से बड़ा अंतर है।

  • शेर (Couplet): दो पंक्तियों का स्वतंत्र विचार, जिसमें पहली पंक्ति को मिसरा-ए-ऊला और दूसरी को मिसरा-ए-सानी कहते हैं।
  • ग़ज़ल: एक ही बहर (मीटर) और रदीफ़-क़ाफ़िया में कहे गए शेरों का गुलदस्ता।
  • नज़्म: किसी एक विषय (Theme) पर शुरू से अंत तक लिखी गई धाराप्रवाह कविता।