ऐतिहासिक महफ़िल में उर्दू अदब की रौनक

राजधानी दिल्ली के लाल किला मैदान में 100वें अंतर्राष्ट्रीय उर्दू मुशायरे और जश्न-ए-अदब का शानदार आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक शाम में देश-विदेश के 50 से अधिक प्रतिष्ठित शायरों, कवियों और साहित्यकारों ने शिरकत की। महफ़िल की शुरुआत शमा रोशन करके की गई, जिसके बाद पूरी रात शेरो-शायरी और दाद का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मिरे अरमाँ लेकिन फिर भी कम निकले।

— मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब

मशहूर शायरों के कलाम पर गूंजी तालियां

मुशायरे में जब मशहूर शायरों ने मंच संभाला तो श्रोताओं का उत्साह देखते ही बनता था। मोहब्बत, इंसानियत, अमन और ज़िंदगी के फ़लसफ़े पर आधारित अशआर पर देर रात तक "मुकर्रर-मुकर्रर" और "वाह-वाह" की सदाएं गूंजती रहीं।

मुशायरा मंच का विहंगम दृश्य
फोटो: 100वें अंतर्राष्ट्रीय मुशायरा मंच का विहंगम दृश्य (साभार: आयोजक समिति)

📌 कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण (Key Highlights)

  • श्रोताओं की उपस्थिति: 15,000 से अधिक उर्दू और हिंदी प्रेमी श्रोता उपस्थित रहे।
  • विशेष सम्मान: युवा शायरों को 'अदबी नौजवान पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
  • डिजिटल प्रसारण: दुनिया भर के 20 से अधिक देशों में लाइव स्ट्रीमिंग की गई।
"उर्दू सिर्फ़ एक ज़बान नहीं बल्कि दिलों को जोड़ने वाली तहज़ीब है। आज की युवा पीढ़ी का शायरी के प्रति यह लगाव अदब के सुनहरे भविष्य की गवाही देता है।" — कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार

आगामी मुशायरों का कार्यक्रम

आयोजकों ने घोषणा की कि इस श्रृंखला का अगला पड़ाव लखनऊ और हैदराबाद में आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जाएगा।