🇮🇳 बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
दिल की गहराइयों से, वक्त की बेदर्द और बेरहम मार मेरी भीगी आँखों में,
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।