🇮🇳 बेवफा शायरी इन हिंदी
यकीन मानो, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [बेवफा शायरी इन हिंदी 914]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [बेवफा शायरी इन हिंदी 914]