🇮🇳 ४ लाइन शायरी (रुबाई)
हर घड़ी, तेरी चाहत की ये दास्तान मेरी हर सुबह ओ शाम में,
रूह को मदहोश कर रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 311]
रूह को मदहोश कर रहा है, कि हर जन्म में मुझे सिर्फ और सिर्फ तेरा ही साथ चाहिए। [४ लाइन शायरी (रुबाई) 311]